सावन के तीसरे सोमवार के मौके पर उज्जैन, मध्य प्रदेश स्थित महाकालेश्वर मंदिर में भगवान शिव के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। देशभर से लाखों भक्त बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचे, जिससे मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में भारी भीड़ देखने को मिली। इसी दौरान हरसिद्धि मंदिर के पास अचानक अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई, जिससे कुछ श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ने की खबरें सामने आईं। हालांकि महाकालेश्वर मंदिर समिति ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इन खबरों को गलत बताया और स्पष्ट किया कि स्थिति पूरी तरह प्रशासन के नियंत्रण में रही। लेकिन इस घटना ने एक बार फिर उस रहस्यमयी नागचंद्रेश्वर मंदिर की चर्चा छेड़ दी है, जो साल में सिर्फ एक दिन श्रद्धालुओं के लिए खुलता है।
नाग पंचमी पर क्यों बढ़ जाती है भीड़?
नाग पंचमी का दिन सावन महीने में खास धार्मिक महत्व रखता है, और जब यह पर्व सावन सोमवार के साथ मिल जाता है, तो श्रद्धालुओं की आस्था और भी बढ़ जाती है। इस बार भी कुछ ऐसा ही संयोग बना, जिसकी वजह से महाकालेश्वर मंदिर में दर्शनार्थियों की संख्या सामान्य दिनों के मुकाबले कई गुना ज्यादा रही। मंदिर प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन के लिए अतिरिक्त बैरिकेडिंग, पुलिस बल और मेडिकल टीमों की व्यवस्था की थी, बावजूद इसके कुछ जगहों पर दबाव बढ़ने से अव्यवस्था जैसी स्थिति बनी।
साल में सिर्फ 24 घंटे के लिए खुलता है मंदिर
नागचंद्रेश्वर मंदिर, उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर परिसर की तीसरी मंजिल पर स्थित है। इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि इसके कपाट साल के 364 दिन बंद रहते हैं और केवल नाग पंचमी के दिन 24 घंटे के लिए खोले जाते हैं, जिससे श्रद्धालुओं को भगवान के दुर्लभ दर्शन का मौका मिलता है। यही वजह है कि इस एक दिन के लिए देशभर से भक्त उज्जैन पहुंचते हैं, ताकि वे भगवान शिव और नागराज के इस अनोखे स्वरूप के दर्शन कर सकें।
मान्यता है कि यह प्रतिमा इतनी दुर्लभ और अनूठी है कि पूरे भारत में ऐसी कोई और प्रतिमा मौजूद नहीं है, जहां शिव और नागराज एक साथ इस रूप में विराजमान हों। यही कारण है कि इस मंदिर के दर्शन को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिलता है।
इस परंपरा से जुड़ी पौराणिक कथा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नागराज तक्षक ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें अमरता का वरदान दिया। लेकिन तक्षक इससे संतुष्ट नहीं थे और उन्होंने भगवान शिव से प्रार्थना की कि वे हमेशा उनके सान्निध्य में रहना चाहते हैं, इसलिए उन्हें महाकाल वन में निवास करने की अनुमति दी जाए। भगवान शिव ने उनकी यह इच्छा स्वीकार कर ली और उन्हें एकांत साधना का आशीर्वाद दिया।
मान्यता है कि तक्षक देव के इसी एकांत को बनाए रखने के लिए मंदिर के कपाट साल में केवल एक बार, नाग पंचमी के दिन ही खोले जाते हैं। धार्मिक विद्वानों का यह भी मानना है कि इस दिन नागचंद्रेश्वर के दर्शन मात्र से व्यक्ति को कालसर्प दोष और अन्य सर्प दोषों से मुक्ति मिल जाती है, जिस वजह से कालसर्प दोष से पीड़ित श्रद्धालु विशेष रूप से इस दिन उज्जैन पहुंचते हैं।
मंदिर में होती है त्रिकाल पूजा
नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट खुलते ही यहां त्रिकाल पूजा यानी दिन में तीन अलग-अलग समय पर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है:
- पहली पूजा: रात 12 बजे कपाट खुलते ही महानिर्वाणी अखाड़े के संतों द्वारा संपन्न की जाती है।
- दूसरी पूजा (दोपहर): नाग पंचमी के दिन दोपहर 12 बजे प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा की जाती है।
- तीसरी पूजा (संध्या): शाम 7:30 बजे महाकाल की संध्या आरती के बाद मंदिर के पुरोहितों द्वारा की जाती है।
इसके बाद रात 12 बजे विशेष महाआरती होती है और उसके पश्चात मंदिर के कपाट अगले एक साल के लिए फिर बंद कर दिए जाते हैं। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान मंदिर परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहते हैं, ताकि दर्शन व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सकें।
सदियों पुरानी है यह परंपरा
हर साल नाग पंचमी की मध्य रात्रि जैसे ही मंदिर के कपाट खुलते हैं, भगवान शिव और नागराज के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है। सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार, महानिर्वाणी अखाड़े के संत शैव रीति-रिवाजों का पालन करते हुए कपाट खोलने की विधि संपन्न करते हैं। इस दौरान नारियल बांधकर विधिवत पूजन-अर्चन किया जाता है, जिसके बाद ‘जय श्री महाकाल’ और भगवान नागचंद्रेश्वर के जयघोष के साथ मंदिर आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाता है।
स्थानीय पुजारियों के अनुसार, यह परंपरा सैकड़ों वर्षों से बिना किसी बदलाव के चली आ रही है और आज भी उतनी ही श्रद्धा और नियमों के साथ निभाई जाती है, जितनी पहले हुआ करती थी।
भीड़ के बीच प्रशासन की तैयारी
इस साल भारी भीड़ को देखते हुए उज्जैन प्रशासन ने पहले से ही विशेष व्यवस्था की थी, जिसमें अतिरिक्त पुलिस बल, CCTV निगरानी, ड्रोन कैमरों से नजर रखना और मेडिकल कैंप शामिल थे। मंदिर समिति ने श्रद्धालुओं से अपील की थी कि वे धैर्य बनाए रखें और प्रशासन द्वारा बनाए गए मार्ग का ही इस्तेमाल करें, ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था से बचा जा सके।
ज्योतिष और धार्मिक परंपराओं से जुड़ी और खबरें
मंदिरों की परंपराओं, ज्योतिष और शुभ मुहूर्त से जुड़ी ऐसी ही और दिलचस्प खबरों के लिए Jantantra TV को फॉलो करते रहें। इसके अलावा हमारे ट्रेंडिंग सेक्शन और एक्सप्लेनर सेक्शन पर भी ऐसी विस्तृत खबरें पढ़ सकते हैं, जो आपकी आस्था और जिज्ञासा दोनों को संतुष्ट करेंगी।



