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हर साल रक्षाबंधन पर भारतीय घरों में जो एक गाना बार-बार बजता है, वो है “भैया मेरे राखी के बंधन को।” लता मंगेशकर की आवाज़ में गाया गया भाई-बहन के इस अटूट रिश्ते का ये गीत त्योहार की पहचान का इतना हिस्सा बन चुका है कि ज़्यादातर लोग बिना सीखे ही इसे गुनगुना लेते हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इन शब्दों को लिखने वाला कौन था — पीढ़ियों तक भाई-बहनों को भावुक करने वाले इस गीत के पीछे की कहानी, जो इस त्योहारी सीज़न में जानना दिलचस्प है, हमारे मनोरंजन सेक्शन में एक और यादगार किस्सा है। शब्दों के पीछे का नाम: शैलेंद्र इस प्यारे राखी गीत के बोल लिखे थे शैलेंद्र ने, जो हिंदी सिनेमा के सबसे सम्मानित कवियों और गीतकारों में गिने जाते हैं, और उन्होंने ये गीत संगीतकार जोड़ी शंकर-जयकिशन के साथ मिलकर तैयार किया था। शैलेंद्र, जिनका असली नाम शंकरदास केसरीलाल था, इस गीत के रिलीज़ होने तक बॉलीवुड में पहले से ही एक बड़ा नाम बन चुके थे, और सादगी के साथ गहरी भावनाओं को जोड़ने की उनकी कला ने उनके लेखन को हर पीढ़ी के लिए सहज और अपना-सा बना दिया — ऐसी क्लासिक बॉलीवुड की कहानियां अक्सर हमारे मनोरंजन कवरेज में सामने आती रहती हैं। ये गीत 1959 की फिल्म “छोटी बहन” से है, जो एक पारिवारिक ड्रामा है जिसमें बलराज साहनी, नंदा और रहमान मुख्य भूमिकाओं में थे, और इसका निर्देशन एल.वी. प्रसाद ने किया था। दिलचस्प बात ये है कि ये फिल्म खुद 1952 की तमिल फिल्म “एन थंगई” की रीमेक थी, लेकिन इसी हिंदी संस्करण और इसी गीत ने सबसे ज़्यादा गहरी सांस्कृतिक छाप छोड़ी। एक ऐसा गीत जो जीत के करीब पहुंचकर भी जीत नहीं पाया, फिर भी अमर हो गया यहां एक दिलचस्प तथ्य है जो कई लोगों को हैरान कर सकता है: राखी के मौके पर बजने वाले बॉलीवुड के सबसे यादगार गीतों में गिने जाने के बावजूद, “भैया मेरे राखी के बंधन को” को 1960 में हुए 7वें फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में सिर्फ नामांकन मिला था, जीत नहीं। लता मंगेशकर को इस गीत के लिए बेस्ट प्लेबैक सिंगर की कैटेगरी में नामांकित किया गया था, लेकिन उस साल की कड़ी प्रतिस्पर्धा में ये अवॉर्ड किसी और के हाथ गया। फिर भी ये गीत उस दौर के कई असली विजेता गीतों से कहीं ज़्यादा लंबे समय तक याद रखा गया — जो ये दिखाता है कि किसी गीत की असली पहचान अक्सर ट्रॉफी से नहीं, बल्कि जनता के दिलों से तय होती है। “छोटी बहन” को उस समारोह में कुल छह नामांकन मिले थे, जिनमें बेस्ट फिल्म और बेस्ट डायरेक्टर की कैटेगरी भी शामिल थीं — जो दिखाता है कि उस साल ये फिल्म कितनी सराही गई थी, ऐसी पुरानी अवॉर्ड्स की दिलचस्प बातें आज भी हमारे समाचार और मनोरंजन आर्काइव सेक्शन में पुराने बॉलीवुड फैंस को आकर्षित करती हैं। इतने सालों बाद भी ये गीत क्यों दिल छू लेता है “भैया मेरे राखी के बंधन को” की लोकप्रियता की एक बड़ी वजह इसका सार्वभौमिक भाव है। गीत के बोल सीधे भाई को संबोधित करते हुए राखी के पवित्र बंधन को निभाने और छोटी बहन को कभी न भूलने की गुज़ारिश करते हैं — एक सीधी-सादी लेकिन दिल को छू लेने वाली बात, जो फिल्म के किरदारों से आगे बढ़कर भारत के हर भाई-बहन के रिश्ते से जुड़ जाती है। शैलेंद्र की यही खासियत थी कि उनके गीत नाटकीय नहीं, बल्कि निजी और सच्चे लगते थे, और यही वजह है कि ये गीत आज भी इतना असरदार लगता है। लता मंगेशकर की आवाज़ ने भी इसमें बड़ी भूमिका निभाई। उनकी गायकी में जो संयम और गर्मजोशी थी, उसने इस गीत को महज़ एक फिल्मी गाना नहीं, बल्कि बहन की तरफ से भाई को भेजा गया एक सच्चा संदेश जैसा बना दिया — यही वजह है कि ये गीत अनौपचारिक रूप से रक्षाबंधन का एंथम बन गया, जो हर साल त्योहार के मौके पर घरों में, रेडियो पर और अब स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर भी बजता है, ऐसी त्योहारी परंपराएं हमारे लाइफस्टाइल सेक्शन में भी अक्सर कवर होती रहती हैं। एक विरासत जो अपने रचयिता से भी लंबी चली शैलेंद्र की अपनी कहानी इस गीत की विरासत में एक भावुक परत और जोड़ देती है। अपनी पीढ़ी के सबसे कामयाब गीतकारों में गिने जाने और करियर में तीन बार बेस्ट लिरिसिस्ट का फिल्मफेयर अवॉर्ड जीतने के बावजूद, उनका जीवन महज़ 43 साल की उम्र में 1966 में खत्म हो गया — उनकी इकलौती बनाई फिल्म “तीसरी कसम” के प्रोडक्शन के दौरान आए तनाव से जुड़ी सेहत की दिक्कतों की वजह से। दिलचस्प बात ये है कि यही फिल्म बाद में बेस्ट फीचर फिल्म का नेशनल फिल्म अवॉर्ड जीती, हालांकि रिलीज़ के समय ये व्यावसायिक रूप से असफल रही थी। ये एक ऐसे करियर का कड़वा-मीठा किस्सा है जिसने हिंदी सिनेमा को उसके सबसे प्यारे और चिरस्थायी गीतों में से कुछ दिए — जिनमें से एक गीत आज, रिलीज़ के 65 से भी ज़्यादा साल बाद, हर साल देशभर के घरों में रक्षाबंधन के जश्न का हिस्सा बना हुआ है। बॉलीवुड की संगीत विरासत से जुड़ी ऐसी ही और कहानियों के लिए हमारे मनोरंजन सेक्शन को फॉलो करते रहें। यह रिपोर्ट विकिपीडिया, फिल्मफेयर अवॉर्ड्स आर्काइव्स, और 1959 की फिल्म “छोटी बहन” तथा उसके साउंडट्रैक से जुड़ी विभिन्न संगीत डेटाबेस से जुटाई गई जानकारी पर आधारित है।