Business and Finance

Business and Finance

अमेरिका से लड़ाई के बीच ईरान के हाथ लगा खजाना, फार्स में मिला 200 अरब क्यूबिक मीटर प्राकृतिक गैस का भंडार

अमेरिका और इजरायल के साथ महीनों से चल रहे तनाव और उसके चलते ऊर्जा ढांचे को पहुंचे नुकसान के बीच ईरान के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान ने रविवार को ऐलान किया कि उसके दक्षिणी फार्स प्रांत में 200 अरब क्यूबिक मीटर से ज्यादा प्राकृतिक गैस का एक विशाल भंडार खोजा गया है। इसे मौजूदा हालात में ईरान की ऊर्जा अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा सहारा माना जा रहा है। दुनियाभर की ऐसी ही बड़ी और चौंकाने वाली ट्रेंडिंग खबरें आप जानतंत्र TV पर पढ़ सकते हैं।  कहां हुई खोज और किसने की घोषणा  ईरान के पेट्रोलियम मंत्री मोहसिन पाकनेजाद ने राष्ट्रीय टीवी पर इस खोज की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह नया गैस भंडार दक्षिणी फार्स प्रांत में मिला है और इसमें से 160 अरब क्यूबिक मीटर से ज्यादा गैस निकाली जा सकती है। कुछ रिपोर्टों में कुल भंडार का आंकड़ा 212 अरब क्यूबिक मीटर तक बताया गया है, जबकि निकाली जा सकने वाली गैस की मात्रा लगभग 160-161 अरब क्यूबिक मीटर के आसपास है।  क्यों खास है यह गैस भंडार  पाकनेजाद के मुताबिक इस भंडार में मिलने वाली गैस “स्वीट नेचुरल गैस” यानी मीठी प्राकृतिक गैस की श्रेणी में आती है। इसका मतलब है कि इसमें जहरीली हाइड्रोजन सल्फाइड गैस की मात्रा बहुत कम है। यह खासियत इस गैस को निकालने और उसे प्रोसेस करने की लागत को काफी हद तक कम कर सकती है, जिससे इस प्रोजेक्ट का आर्थिक रूप से फायदेमंद होना आसान हो जाएगा।  मंत्री ने यह भी बताया कि इतनी मात्रा में गैस उतनी ही है, जितनी ईरान के विशाल साउथ पार्स गैस फील्ड के एक चरण से करीब 15 साल में मिल पाती है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह खोज ईरान के लिए कितनी अहम साबित हो सकती है।  युद्ध के दौर में मिली यह खबर  यह घोषणा ऐसे समय पर हुई है जब पिछले कई महीनों से अमेरिका और इजरायल के हमलों ने ईरान के ऊर्जा ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। गैस उत्पादन सुविधाओं, तेल डिपो और परिवहन मार्गों पर हुए हमलों की वजह से ईरान की रोजाना गैस उत्पादन क्षमता में भारी गिरावट आई है। ऐसे नाजुक समय में नए भंडार की खोज को ईरान सरकार अपनी ऊर्जा भविष्य की मजबूत नींव के तौर पर पेश कर रही है। मिडिल ईस्ट और पड़ोसी देशों से जुड़ी अन्य अंतरराष्ट्रीय खबरों पर भी नजर बनाए रखें।  हालांकि विशेषज्ञों की मानें तो इस भंडार से वास्तविक उत्पादन शुरू होने में अभी कई साल लग सकते हैं, यानी फिलहाल इसका सीधा फायदा ईरान की मौजूदा गैस सप्लाई की कमी को पूरा करने में नहीं मिलेगा।  ईरान के पास पहले से है दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गैस भंडार  गौरतलब है कि ईरान पहले से ही दुनिया में रूस के बाद सबसे बड़े प्राकृतिक गैस भंडार वाला देश है। ऐसे में यह नई खोज उसकी ऊर्जा महाशक्ति की स्थिति को और मजबूत करती है, खासकर तब जब देश अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों और सैन्य दबाव का सामना कर रहा है। वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार पर इसके असर से जुड़ी बिजनेस खबरें यहां पढ़ें।  निष्कर्ष  अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव और सैन्य टकराव के इस दौर में फार्स प्रांत में मिला यह गैस भंडार ईरान के लिए किसी खजाने से कम नहीं है। भले ही इसका तत्काल फायदा न मिले, लेकिन लंबे समय में यह खोज ईरान की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए एक अहम कड़ी साबित हो सकती है। ऐसी ही और गहराई से समझी गई खबरों के लिए हमारे एक्सप्लेनर सेक्शन पर जाएं।  यह भी पढ़ें  यह लेख विभिन्न समाचार एजेंसियों की रिपोर्ट्स पर आधारित है। 

Stock Market Down, सप्ताह के पहले दिन शेयर बाजार में गिरावट और IT-टेक स्टॉक्स में बड़ी गिरावट दर्शाता 3D वित्तीय ग्राफिक
Business and Finance

Stock Market Down: सप्ताह के पहले दिन बिखरा शेयर बाजार, IT-टेक स्टॉक्स में सबसे बड़ी गिरावट 

शेयर बाजार में सोमवार को कारोबार की शुरुआत बेहद कमजोर रही। बीते सप्ताह पहले ही भारी उथल-पुथल झेल चुके निवेशकों के लिए हफ्ते का पहला दिन भी राहत भरा नहीं रहा। बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी, दोनों प्रमुख इंडेक्स भारी गिरावट के साथ रेड जोन में खुले। इस दौरान सबसे ज्यादा दबाव आईटी और टेक शेयरों पर देखने को मिला, जिनमें खुलते ही तेज बिकवाली शुरू हो गई।  सेंसेक्स-निफ्टी खुलते ही फिसले  सोमवार को कारोबार शुरू होते ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में गिरावट देखने को मिली, और जैसे-जैसे ट्रेडिंग आगे बढ़ी, यह गिरावट और गहरी होती चली गई। बीएसई सेंसेक्स पिछले शुक्रवार के 78,009 के बंद स्तर की तुलना में फिसलकर 77,892 पर खुला, और इसके बाद तेज गिरावट लेते हुए 429 अंकों की गिरावट के साथ 77,579 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। दूसरी तरफ, एनएसई का निफ्टी इंडेक्स भी कुछ इसी तरह के हाल में रहा। पिछले बंद 24,366 की तुलना में गिरावट के साथ रेड जोन में खुलने के बाद यह 50 शेयरों वाला इंडेक्स भी 100 अंकों से ज्यादा टूटकर 24,259 के स्तर पर आ गया।  आईटी-टेक शेयरों में सबसे तेज गिरावट  बाजार में जारी बिकवाली के बीच बीएसई की लार्जकैप कैटेगरी में शामिल 30 में से 28 शेयर गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए। इनमें भी सबसे ज्यादा असर आईटी और टेक कंपनियों के शेयरों पर पड़ा। TCS के शेयर में करीब 1.60% की गिरावट रही, तो Infosys का शेयर भी 1.55% टूटा। HCL Tech के शेयर में 1.45%, Tech Mahindra में 1.20% और Mphasis के शेयर में सबसे ज्यादा 3.10% तक की गिरावट देखी गई। इस तरह देश की तमाम बड़ी आईटी कंपनियों के शेयर सुबह के कारोबार में ही निवेशकों को झटका देते नजर आए।  अन्य सेक्टरों के शेयर भी टूटे  सिर्फ आईटी-टेक ही नहीं, बल्कि अन्य सेक्टरों के शेयरों पर भी दबाव देखा गया। मिडकैप कैटेगरी में शामिल Voltas के शेयर में 2.60%, Phoenix में 2%, Fortis में 1.90% और IDFC First Bank के शेयर में 1.20% की गिरावट दर्ज की गई। वहीं लार्जकैप शेयरों की बात करें तो HUL में 1.40%, SBI में 1.35% और M&M के शेयर में 1.30% तक की गिरावट रही। इससे साफ है कि बिकवाली का दबाव सिर्फ किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लगभग पूरे बाजार पर इसका असर देखने को मिला।  आखिर क्यों टूटा बाजार? जानें बड़े कारण  बाजार में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे कई घरेलू और वैश्विक कारण बताए जा रहे हैं। मिडिल ईस्ट में युद्ध की स्थिति भले ही थमी हो, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले तेल और गैस जहाजों की आवाजाही अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है। इसके अलावा अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता को लेकर भी कोई ठोस प्रगति सामने नहीं आ रही है, जिसका सीधा असर वैश्विक बाजारों के सेंटीमेंट पर पड़ा है और भारतीय बाजार भी इससे अछूता नहीं रहा। 

Scroll to Top