शेयर बाजार में सोमवार को कारोबार की शुरुआत बेहद कमजोर रही। बीते सप्ताह पहले ही भारी उथल-पुथल झेल चुके निवेशकों के लिए हफ्ते का पहला दिन भी राहत भरा नहीं रहा। बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी, दोनों प्रमुख इंडेक्स भारी गिरावट के साथ रेड जोन में खुले। इस दौरान सबसे ज्यादा दबाव आईटी और टेक शेयरों पर देखने को मिला, जिनमें खुलते ही तेज बिकवाली शुरू हो गई।
सेंसेक्स-निफ्टी खुलते ही फिसले
सोमवार को कारोबार शुरू होते ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में गिरावट देखने को मिली, और जैसे-जैसे ट्रेडिंग आगे बढ़ी, यह गिरावट और गहरी होती चली गई। बीएसई सेंसेक्स पिछले शुक्रवार के 78,009 के बंद स्तर की तुलना में फिसलकर 77,892 पर खुला, और इसके बाद तेज गिरावट लेते हुए 429 अंकों की गिरावट के साथ 77,579 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। दूसरी तरफ, एनएसई का निफ्टी इंडेक्स भी कुछ इसी तरह के हाल में रहा। पिछले बंद 24,366 की तुलना में गिरावट के साथ रेड जोन में खुलने के बाद यह 50 शेयरों वाला इंडेक्स भी 100 अंकों से ज्यादा टूटकर 24,259 के स्तर पर आ गया।
आईटी-टेक शेयरों में सबसे तेज गिरावट
बाजार में जारी बिकवाली के बीच बीएसई की लार्जकैप कैटेगरी में शामिल 30 में से 28 शेयर गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए। इनमें भी सबसे ज्यादा असर आईटी और टेक कंपनियों के शेयरों पर पड़ा। TCS के शेयर में करीब 1.60% की गिरावट रही, तो Infosys का शेयर भी 1.55% टूटा। HCL Tech के शेयर में 1.45%, Tech Mahindra में 1.20% और Mphasis के शेयर में सबसे ज्यादा 3.10% तक की गिरावट देखी गई। इस तरह देश की तमाम बड़ी आईटी कंपनियों के शेयर सुबह के कारोबार में ही निवेशकों को झटका देते नजर आए।
अन्य सेक्टरों के शेयर भी टूटे
सिर्फ आईटी-टेक ही नहीं, बल्कि अन्य सेक्टरों के शेयरों पर भी दबाव देखा गया। मिडकैप कैटेगरी में शामिल Voltas के शेयर में 2.60%, Phoenix में 2%, Fortis में 1.90% और IDFC First Bank के शेयर में 1.20% की गिरावट दर्ज की गई। वहीं लार्जकैप शेयरों की बात करें तो HUL में 1.40%, SBI में 1.35% और M&M के शेयर में 1.30% तक की गिरावट रही। इससे साफ है कि बिकवाली का दबाव सिर्फ किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लगभग पूरे बाजार पर इसका असर देखने को मिला।
आखिर क्यों टूटा बाजार? जानें बड़े कारण
बाजार में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे कई घरेलू और वैश्विक कारण बताए जा रहे हैं। मिडिल ईस्ट में युद्ध की स्थिति भले ही थमी हो, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले तेल और गैस जहाजों की आवाजाही अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है। इसके अलावा अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता को लेकर भी कोई ठोस प्रगति सामने नहीं आ रही है, जिसका सीधा असर वैश्विक बाजारों के सेंटीमेंट पर पड़ा है और भारतीय बाजार भी इससे अछूता नहीं रहा।
इसके साथ ही भारतीय करेंसी रुपया भी एक बार फिर डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 95.48 के स्तर पर खुला, जिसने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी। सेंसेक्स-निफ्टी के लिए एक अहम संकेतक माने जाने वाले गिफ्ट निफ्टी में भी सोमवार को शुरुआत से ही गिरावट देखी गई, और खबर लिखे जाने तक यह इंडेक्स 130 अंकों की गिरावट के साथ रेड जोन में कारोबार कर रहा था।
निवेशकों के लिए क्या है सलाह?
बाजार में इस तरह की उठापटक के बीच बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को घबराहट में कोई भी बड़ा फैसला लेने से बचना चाहिए। किसी भी तरह के नए निवेश से पहले अपने मार्केट एक्सपर्ट या वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लेनी चाहिए, क्योंकि वैश्विक और घरेलू दोनों स्तर पर स्थितियां अभी भी अनिश्चित बनी हुई हैं।
बिजनेस और फाइनेंस से जुड़ी और खबरें
शेयर बाजार, निवेश और बजट से जुड़ी हर बड़ी खबर सबसे पहले पाने के लिए Jantantra TV के न्यूज़ सेक्शन को फॉलो करते रहें। इसके अलावा देश-दुनिया की हर ताजा अपडेट के लिए हमारा ट्रेंडिंग सेक्शन भी जरूर देखें।
(नोट: शेयर बाजार में किसी भी तरह के निवेश से पहले अपने मार्केट एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें।)



